आयुष ग्राम चिकित्सालय (न्यास) में नवनिर्मित सामान्य रोगी कक्ष (द्वितीय) के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ० अशोक कुमार वार्ष्णेय, राष्ट्रीय संगठन सचिव, आरोग्य भारती ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि ‘व्यक्ति रोगी न बने, यह हमारी पहली व्यवस्था है; और यदि रोगी हो जाए तो उसके समुचित निदान की भी पूर्ण व्यवस्था हमारे शास्त्रों में वर्णित है।’ हम सबका प्रयास होना चाहिए कि व्यक्ति रोगी न बने, किन्तु जीवन की परिस्थितियों और एक ही प्रकार के कार्यों को लंबे समय तक करने के कारण कुछ लोग रोगग्रस्त हो ही जाते हैं। इसी दृष्टि से हमारे शास्त्रों में दोनों प्रकार की व्यवस्थाएँ—रोग-निवारण एवं रोग-निदान—का विस्तारपूर्वक वर्णन मिलता है।
उन्होंने आगे कहा कि परतंत्रता के काल में अंग्रेजी चिकित्सा पद्धति का अत्यधिक प्रसार हुआ और राज्याश्रय मिलने से लोगों में यह धारणा बन गई कि यही एकमात्र उपचार का माध्यम है, जबकि हमारे पास प्राचीन काल से ही एक सुदृढ़, प्रमाणित (Evidence based) वैदिक चिकित्सा पद्धति उपलब्ध है। आयुष ग्राम जैसे संस्थान उस समय आशा का केंद्र बनते हैं जब व्यक्ति निराश हो चुका होता है, और यहाँ से स्वस्थ होकर लौटता है। ऐसे संस्थानों को निरंतर पुष्पित-पल्लवित करना चाहिए।
आयुष ग्राम चिकित्सालय (न्यास), सूरजकुंड रोड (आयुष ग्राम मार्ग) चित्रकूट उ०प्र० में बढ़ती रोगियों के संख्या के दृष्टिगत उनके सुविधाओं एवं स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के क्रम में आयुष ग्राम चिकित्सालय परिसर में नवनिर्मित सामान्य रोगी कक्ष (द्वितीय) के निर्माण कार्य पूर्ण होने के उपरांत कक्ष के उद्घाटन समारोह में पधारे मुख्य अतिथि डॉ० अशोक वार्ष्णेय, राष्ट्रीय संगठन सचिव आरोग्य भारती जी का वैदिक संस्कारों से अलंकृत गुरुकुल के विद्यार्थियों ने मंगल श्लोकों का सस्वर वाचन कर सुस्वागत किया तथा चिकित्सालय के समर्पित पदाधिकारियों ने पुष्पगुच्छ एवं माल्यार्पण कर अभिनंदन किया।
तत्पश्चात मुख्य अतिथि डॉ० वार्ष्णेय आरोग्य प्रणेता भगवान धन्वंतरि जी का पूजन एवं दीप प्रज्वलित कर उक्त नवीन कक्ष को रोगियों के सेवा हेतु चिकित्सालय को समर्पित किया।
उद्घाटन समारोह के सम्पन्न होने पर मुख्य अतिथि महोदय ने चिकित्सालय के अधिकारियों के साथ आयुष ग्राम ट्रस्ट द्वारा संचालित समस्त प्रकल्पों आयुष ग्राम चिकित्सालय के अंतरंग विभाग (आईपीडी) में जाकर एक-एक रोगी से भेंट की, पंचकर्म, गुरुकुल, गोसेवालय का अवलोकन कर पश्चात् आयुष विहारी श्री राम मंदिर दरबार के दर्शन भी किया।
इस दौरान उन्होंने संस्था द्वारा सेवा भाव और प्रमाणिकता (एवीडेन्स बेस्ड) पूर्वक आयुर्वेद चिकित्सा की सराहना की। उन्हें कहा कि यह कार्य राष्ट्र के अस्तित्व को सुदृढ़ करने और आयुर्वेद के प्रमाणीकरण एवं विकास में सहायक हैं और उन्होंने कहा कि आयुष ग्राम चिकित्सालय आयुर्वेद के नवस्नातकों के शिक्षण-प्रशिक्षण हेतु अपने आप में अनोखा केन्द्र है।
डॉ० वार्ष्णेय ने संस्था की गतिविधियों के अवलोकन के पश्चात अपने अभिमत भी विजिटिंग रजिस्टर में अंकित किए।
पश्चात् मुख्य अतिथि एवं अन्य सभी अतिथियों ने पूज्य गुरु आचार्य डॉ मदन गोपाल वाजपेयी जी के साथ शुद्ध सात्विक भारतीय परम्परा को धारण कर भोजन प्रसाद ग्रहण किया।
अंत में पूज्य गुरु जी आचार्य डॉ० मदनगोपाल वाजपेयी, डॉ० वार्ष्णेय एवं राष्ट्रीय संगठन के प्रतिनिधियों के मध्य राष्ट्र, संस्कृति, संस्कृत, एवं आरोग्य भारत के संदर्भ में विस्तृत आत्मीय संवाद हुआ।
