श्री श्री रविशंकर जी के 70 वे जन्मदिवस एवं आर्ट ऑफ़ लिविंग के 45 वे स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में सम्पूर्ण देश भर के प्रमुख लोगों को आमंत्रित किया गया था जिसमें आरोग्य भारती की ओर से डॉ॰ अशोक कुमार वार्ष्णेय जी को भी आमंत्रित किया गया था । श्री श्री रविशंकर जी से भेंट एवं वार्ता बहुत ही सार्थक रही । अशोक जी के द्वारा आरोग्य सम्पदा एवं जानकारी पत्रक भेंट की गयी तथा आरोग्य भारती के कार्यक्रम हेतु आमंत्रित किया गया साथ ही आध्यात्मिक स्वास्थ्य के कार्यक्रम हेतु आग्रह किया जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया । सम्पूर्ण परिसर का वातावरण बहुत ही सुन्दर एवं सकारात्मक था । आश्रम में 30 हज़ार लोगों का भोजन नियमित होता है । 20 प्रजाति की 1600 गायों का गौशाला है । गुरुकुल में निःशुल्क वेद अध्ययन करने वाले विद्यार्थी निवास करते हैं । बहुत ही आकर्षक मंदिर की स्थापना की गई है । आयुर्वेद की फैक्ट्री में एक हज़ार प्रकार की औषधि का निर्माण किया जाता है जो कि बहुत ही उच्च गुणवत्ता वाला है । आश्रम में प्रतिदिन जिज्ञासा समाधान कार्यक्रम संपन्न होता है जिसमें सभी प्रकार के प्रश्न सभी आयु वर्ग के लोगों के द्वारा पूछे जाते हैं । एक युवा के द्वारा पूछा गया प्रश्न कि तप क्या है के उत्तर में उन्होंने कहा कि द्वन्द को सहन करना एवं अपने क्षमता को बनाये रखना ही तप है । Choiceless Awareness के प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि Acceptance अर्थात् स्वीकार्यता होना चाहिए । आने से जाने तक की सम्पूर्ण व्यवस्था आश्रम के सहयोगियों के द्वारा ही की गई थी । इस कार्यक्रम में केंद्रीय कार्यालय की ओर से कार्यालय प्रमुख श्री मिहिर कुमार एवं स्थानीय कार्यकर्ता के रूप में दक्षिण कर्नाटक प्रांत कार्यकारिणी सदस्य श्री अनंत स्वामी जी उपस्थित थे ।
