आध्यात्मिक स्वास्थ्य के बिना समग्र स्वास्थ्य की कल्पना अधूरी : डॉ. पुण्डरीक गोस्वामी

आरोग्य भारती व्याख्यानमाला का 12वां वार्षिकोत्सव संपन्न, स्वास्थ्य के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक आयामों पर हुआ मंथन

आरोग्य भारती व्याख्यानमाला का 12वां वार्षिकोत्सव

भोपाल। आरोग्य भारती मध्य भारत प्रांत द्वारा स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से विगत 11 वर्षों से आयोजित की जा रही मासिक व्याख्यानमाला का 12वां वार्षिकोत्सव गुरुवार को हँसध्वनी सभागार, रवीन्द्र भवन, भोपाल में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का मुख्य विषय “सर्व समावेशी स्वास्थ्य के लिए आध्यात्मिक स्वास्थ्य आवश्यक है” रहा। कार्यक्रम में स्वास्थ्य को केवल शारीरिक स्वस्थता तक सीमित न रखते हुए मानसिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक आयामों के साथ समग्र रूप से समझने पर विचार-विमर्श हुआ।

कार्यक्रम में देश के सुप्रसिद्ध चिंतक, विचारक एवं कथावाचक परम पूज्य डॉ. पुण्डरीक गोस्वामी जी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर जी तथा सारस्वत अतिथि आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय जी रहे। कार्यक्रम का स्वागत उद्बोधन डॉ. मिहिर कुमार जी ने दिया।

आरोग्य भारती की संरचना और चार स्तंभों की दी जानकारी

सारस्वत अतिथि डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय जी ने अपने उद्बोधन में आरोग्य भारती की नीतियों, संरचना, उद्देश्य एवं कार्यपद्धति पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने आरोग्य भारती के चार प्रमुख स्तंभों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि संगठन स्वास्थ्य के व्यापक दृष्टिकोण को समाज तक पहुंचाने के लिए किस प्रकार कार्य कर रहा है।

उन्होंने आरोग्य भारती के उद्देश्य और उसकी संगठनात्मक संरचना को स्पष्ट करते हुए स्वास्थ्य के प्रति जन-जागरूकता को सामाजिक दायित्व के रूप में देखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि आरोग्य भारती का प्रयास केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्ति और समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता विकसित करना तथा स्वस्थ जीवनशैली के लिए आवश्यक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना भी इसका महत्वपूर्ण उद्देश्य है।

आरोग्य भारती के कार्यों की सराहना की : नरेन्द्र सिंह तोमर

मुख्य अतिथि श्री नरेन्द्र सिंह तोमर जी ने अपने उद्बोधन में आरोग्य भारती द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने संगठन के कार्यों को महत्वपूर्ण बताते हुए आरोग्य भारती को शुभकामनाएं दीं तथा समाज में स्वास्थ्य जागरूकता के लिए किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता समाज की आवश्यकता है और इस दिशा में आरोग्य भारती द्वारा लगातार किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। उन्होंने आरोग्य भारती की व्याख्यानमाला के 12 वर्ष पूर्ण होने पर संगठन के कार्यकर्ताओं को शुभकामनाएं दीं।

शास्त्रों और वेदों के प्रमाणों से समझाया आध्यात्मिक स्वास्थ्य का महत्व

मुख्य वक्ता परम पूज्य डॉ. पुण्डरीक गोस्वामी जी ने अपने विस्तृत व्याख्यान में स्वास्थ्य के शारीरिक पक्ष के साथ मानसिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने शास्त्रों एवं वेदों के विभिन्न प्रमाणों और प्रसंगों के माध्यम से यह समझाया कि भारतीय चिंतन परंपरा में स्वास्थ्य को व्यापक और समग्र दृष्टि से देखा गया है।

उन्होंने अपने वक्तव्य में स्वास्थ्य के प्रिवेंटिव (निवारक) पहलू को विशेष रूप से समाहित करते हुए बताया कि स्वस्थ रहने के लिए केवल बीमारी होने के बाद उसका उपचार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बीमारी से बचाव और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति पहले से सजग रहना भी आवश्यक है।

डॉ. पुण्डरीक गोस्वामी जी ने आध्यात्मिक स्वास्थ्य को व्यक्ति के जीवन का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि मनुष्य के पूर्ण स्वास्थ्य के लिए केवल शरीर का स्वस्थ होना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने आध्यात्म से जुड़ाव, जीवन में संतुलन और आंतरिक स्वास्थ्य के महत्व को स्पष्ट किया तथा बताया कि आध्यात्मिक दृष्टि व्यक्ति को भीतर से स्वस्थ और संतुलित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उन्होंने यह भी समझाया कि व्यक्ति यदि आध्यात्म से जुड़ता है तो वह अपने जीवन में स्वास्थ्य के व्यापक आयामों को समझते हुए अधिक संतुलित और स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ सकता है।

“रोग के उपचार के साथ उसके मूल कारण पर भी ध्यान देना जरूरी”

अपने वक्तव्य के दौरान डॉ. पुण्डरीक गोस्वामी जी ने एक प्रसंग के माध्यम से स्वास्थ्य और रोग के मूल कारण को समझने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि केवल बीमारी के बाहरी लक्षणों का उपचार कर देना पर्याप्त नहीं है। रोग के पीछे छिपे मूल कारण को समझना और उस पर ध्यान देना भी आवश्यक है।

उन्होंने इसी संदर्भ में स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य को केवल बाहरी स्तर पर देखने के बजाय व्यक्ति के जीवन, मन और उसके आंतरिक पक्ष को भी समझना होगा। उनके अनुसार समग्र स्वास्थ्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए शरीर के साथ मन और आध्यात्मिक पक्ष की स्वस्थता पर भी ध्यान देना आवश्यक है।

कार्यक्रम के दौरान आरोग्य भारती की स्वास्थ्य जागरूकता की यात्रा, उसके उद्देश्यों और समाज में स्वस्थ जीवन के प्रति जागरूकता विकसित करने के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम में चिकित्सकों, स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, विद्यार्थियों एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नागरिकों की सहभागिता रही।

कार्यक्रम ने “आरोग्यम् मम् स्वभावः अधिकार, कर्तव्यं च” अर्थात “My Health is My Responsibility” के संदेश को केंद्र में रखते हुए स्वास्थ्य को व्यक्तिगत जिम्मेदारी के साथ-साथ सामाजिक दायित्व के रूप में समझने का संदेश दिया।

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