IIT (ISM) धनबाद में राष्ट्रीय
पर्यावरण कार्यशाला-2 संपन्न
धनबाद। आरोग्य भारती द्वारा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी-आईएसएम) धनबाद के सहयोग से ‘राष्ट्रीय पर्यावरण कार्यशाला’ आयोजित की गई, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में माननीय राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार उपस्थित थे। कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से विशेषज्ञ तथा कार्यकर्ता शामिल हुए।
कई विशेषज्ञों व वैज्ञानिकों
भी ने किया संबोधित
इस मौके पर विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राकेश पंडित जी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ जी एस तोमर जी, राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ अशोक कुमार वार्ष्णेय जी समेत राष्ट्रीय पर्यावरण प्रमुख श्री प्रवीण प्रभाकर, आईआईटी के पर्यावरण विभाग के प्राध्यापक डॉ अंशुमाली, केंद्रीय खनन शोध संस्थान के वरीय वैज्ञानिक डॉ नारायण कुमार भगत, साहेबगंज कालेज के प्राचार्य सह पर्यावरणविद डॉ रंजीत सिंह जी, डॉ इंद्रनील बसु जी आदि ने संबोधित किया।
अध्यक्षता आई आई टी, आई एम एम के निदेशक डॉ सुकुमार मिश्र जी ने की तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रांत कार्याध्यक्ष डॉ शंभू प्रसाद जी ने किया। मंच संचालन प्रांत उपाध्यक्ष डॉ देवेंद्र नाथ तिवारी जी ने किया ।
राज्यपाल ने आरोग्य भारती
के प्रयासों की सराहना की
राज्यपाल संतोष गंगवार ने स्वास्थ्य और पर्यावरण जागरूकता के क्षेत्र में आरोग्य भारती के प्रयासों की सराहना की और कहा कि आरोग्य भारती ने सभी चिकित्सा पद्धतियों को एक मंच प्रदान किया है।
स्मारिका व पर्यावरण
दिग्दर्शिका का विमोचन
राज्यपाल संतोष गंगवार तथा अन्य अतिथियों नने आरोग्य भारती द्वारा प्रकाशित स्मारिका तथा पर्यावरण दिग्दर्शिका का विमोचन भी किया। उन्होंने कहा कि इनसे पर्यावरण कार्यकर्ताओं तथा आम जनता को काफी लाभ मिलेगा।
राज्यपाल का प्रबोधन
आईएसएम के जुबली प्रेक्षागृह में राष्ट्रीय पर्यावरण कार्यशाला को संबोधित करते हुए महामहिम राज्यपाल श्री संतोष गंगवार जी ने कहा कि पर्यावरण, स्वास्थ्य और जीवनशैली एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय जीवन-दृष्टि में प्रकृति के प्रति सम्मान हमारी परंपरा का अभिन्न हिस्सा रहा है। आज जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण एवं जैव-विविधता के संरक्षण जैसी चुनौतियाँ हमारे सामने हैं। ऐसे समय में प्रकृति के साथ संतुलित एवं सह-अस्तित्वपूर्ण जीवन-दृष्टि की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है।
राज्यपाल महोदय ने कहा कि पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान केवल सरकार के प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए समाज, शैक्षणिक संस्थानों, वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों एवं प्रत्येक नागरिक की सहभागिता आवश्यक है। जल एवं ऊर्जा की बचत तथा प्रकृति के प्रति जिम्मेदार व्यवहार जैसे छोटे-छोटे प्रयास पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवनशैली एवं पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने इस क्रम में योग की अहमियत का उल्लेख करते हुए कहा कि योग शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन एवं समग्र कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
माननीय राज्यपाल ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य करते समय उपचार के साथ-साथ रोगों की रोकथाम, स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित पोषण, योग एवं स्वच्छ पर्यावरण पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों एवं स्वास्थ्य संबंधी दृष्टिकोणों को एक मंच पर लाकर समग्र स्वास्थ्य की दिशा में सार्थक प्रयास किए जा सकते हैं। इस दृष्टि से आरोग्य भारती का कार्य विशेष रूप से प्रासंगिक है।
राज्यपाल महोदय ने कहा कि आईआईटी (आईएसएम), धनबाद जैसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से पर्यावरणीय चुनौतियों के व्यावहारिक एवं टिकाऊ समाधान विकसित किए जा सकते हैं। जल संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा, अपशिष्ट प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण तथा पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों के क्षेत्र में अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं एवं विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे पर्यावरण संरक्षण को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएँ तथा अपने परिवार एवं समाज को भी इसके लिए प्रेरित करें।
हम अपने जीवन में जरूरत के लिए प्रकृति के संसाधनों का सीमित उपयोग करें अनावश्यक खनन और दुरूपयोग से पारिस्थितिकी तंत्र नष्ट होता है और खामियाजा अंततः हमें ही भुगतना पड़ता है।
