आरोग्य भारती एवं विश्व आयुर्वेद मिशन के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय ज्ञान परम्परा पर पद्मश्री प्रोफेसर राम हर्ष सिंह स्मृति व्याख्यान का आयोजन महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर में सम्पन्न
महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के अन्तर्गत संचालित फार्मेसी कॉलेज में पद्मश्री प्रोफेसर राम हर्ष सिंह की पुण्यतिथि के अवसर पर आज आरोग्य भारती एवं विश्व आयुर्वेद मिशन के संयुक्त तत्वावधान में “भारतीय ज्ञान परम्परा एवं आयुर्वेद” विषय पर स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया । जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में विश्व आयुर्वेद मिशन के संस्थापक अध्यक्ष एवं आरोग्य भारती के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ जी एस तोमर का उद्बोधन हुआ । प्रारम्भ में श्री दिलीप मिश्रा ने स्वागत एवं अभिनंदन किया एवं प्रवीन कुमार सिंह ने मुख्य अतिथि का परिचय कराया ।। डॉ तोमर ने वेदों को सृष्टि के उत्पत्ति काल से ही ज्ञान का अजस्र स्रोत बताया । उन्होंने कहा कि अथर्ववेद का उपांग होने के नाते आयुर्वेद की प्राचीनता स्वत: प्रमाणित है । भारतीय वांग्मय में आयुर्वेद, योग, प्राकृत विज्ञान, गणित, ज्योतिष, खगोल विज्ञान, विमान शास्त्र एवं धातु विज्ञान की समृद्ध, बहुआयामी, अद्भुत एवं अकल्पनीय ज्ञान परम्परा का दिग्दर्शन होता है । इसकी वैज्ञानिकता आज सम्पूर्ण विश्व मानने लगा है । मंत्रदृष्टा ऋषियों ने अपनी दिव्य दृष्टि एवं अनुभव से जो ज्ञान तत्कालीन ग्रंथों में उकेरा है वह आज के वैज्ञानिक मापदंडों पर पूरी तरह खरा उतर रहा है । डॉ तोमर ने कहा कि आयुर्वेद मात्र एक चिकित्सा विधा ही नहीं सम्पूर्ण जीवन दर्शन है । इसकी गुणवत्ता पूर्ण औषधियाँ जहाँ प्रभावी एवं निरापद हैं वहीं इसकी आदर्श जीवनशैली वैश्विक धरातल पर अनुकरणीय एवं लोकप्रिय सिद्ध हो रही हैं । प्रो. तोमर ने अपने सम्बोधन में आगे कहा कि हम सबके लिए यह प्रसन्नता का विषय है की नई शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परंपरा को स्कूलों और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में शामिल कर लिया गया है। इससे हमारी नई पीढ़ी हमारे ज्ञान परंपरा के गौरव से परिचित हो सकेगी। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय ज्ञान- विज्ञान परंपरा न केवल प्राचीन काल में बल्कि आज भी विज्ञान, चिकित्सा, गणित और अन्य क्षेत्रों में अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए हैं। भारत के मनीषियों और वैज्ञानिकों का योगदान आने वाले समय में भी अमूल्य होगा। भारतीय ज्ञान की यह परंपरा हर पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने कहा कि विकास के शिखर पर वहीं पहुंचते हैं, जो अपने इतिहास पर गौरवान्वित होकर वर्तमान में कठोर परिश्रम द्वारा ध्येयपथ पर अग्रसर होते हैं।
मैं अपने आपको अत्यन्त सौभाग्यशाली समझता हूँ कि मुझे ऐसे तपस्वी एवं विद्वान मनीषी पद्मश्री प्रो. राम हर्ष सिंह के चरणों में विद्याध्ययन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । प्रो. सिंह ने आयुर्वेद के वैज्ञानिक स्वरूप को विश्व के कोने कोने तक पहुंचाया । वह आजीवन आयुर्वेद को लोक कल्याणकारी एवं पीड़ित मानवता के लिए हितकारी बनाने में सन्नद्ध रहे । उनके बताए मार्ग पर चलना ही उनको सच्ची श्रद्धांजलि होगी । कार्यक्रम के अन्त में जुही तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापित किया ।
