‘चाणक्य’ फेम डॉ. चन्द्रप्रकाश द्विवेदी ने कहा – आत्म अवलोकन ही आनंदमय जीवन का मंत्र
आरोग्य भारती भोपाल व्याख्यानमाला का 11वां वार्षिकोत्सव गरिमामय वातावरण में सम्पन्न*
भोपाल, 10 सितम्बर 2025।
आरोग्य भारती भोपाल महानगर द्वारा आयोजित मासिक स्वास्थ्य व्याख्यानमाला का 11वां वार्षिकोत्सव आज अंजनी सभागार, रवीन्द्र भवन, पॉलिटेकनिक चौराहा में अत्यंत गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में चिकित्सक, समाजसेवी, विद्यार्थी, स्वास्थ्य-जागरूक नागरिक एवं मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत
समारोह का शुभारंभ बच्चों द्वारा प्रस्तुत भगवान श्रीराम पर आधारित एक लघु नाटिका से हुआ, जिसने उपस्थित जनों को संस्कृति और मर्यादा की ओर प्रेरित किया। इसके पश्चात् मंचासीन अतिथियों द्वारा भगवान धन्वंतरि के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया गया।
सारस्वत अतिथि डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय (राष्ट्रीय संगठन सचिव, आरोग्य भारती) ने संस्था की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “वर्ष 2002 में आरोग्य भारती की नींव रखी गई थी और आज यह संगठन देश के प्रत्येक प्रांत में सक्रिय है। इसका उद्देश्य केवल बीमारी का उपचार करना नहीं, बल्कि हर नागरिक को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने हेतु प्रेरित करना है।”
मुख्य अतिथि श्री स्वांत रंजन जी (अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख, लखनऊ) ने अपने उद्बोधन में शरीर को साधना का सर्वोच्च साधन बताया। उन्होंने कहा—
- “यदि शरीर स्वस्थ रहेगा तभी हम अपनी पूर्ण कार्यक्षमता से धर्म, समाज और राष्ट्र की सेवा कर पाएंगे।”
- उन्होंने महर्षि शुश्रुत और गीता के श्लोकों का उल्लेख करते हुए कहा कि इंद्रियों, मन और आत्मा के प्रसन्न होने पर ही व्यक्ति वास्तव में आनंदित और स्वस्थ रहता है।
- आहार पर जोर देते हुए उन्होंने कहा—“जैसा आहार होगा, वैसा हमारा मन और स्वास्थ्य होगा।” ऋतुओं के अनुसार भोजन करने और संयमित आहार अपनाने की परंपरा हमारे शास्त्रों में वर्णित है।
- उन्होंने घर की रसोई को औषधालय बताते हुए कहा कि “हमें अधिकतम प्रयास करना चाहिए कि घर का ही भोजन करें, क्योंकि यह सबसे सुरक्षित और संतुलित आहार है।”
- दिनचर्या पर बोलते हुए उन्होंने ब्रह्ममुहूर्त में उठने और नित्य व्यायाम करने को आवश्यक बताया। उनका कहना था कि सुबह की प्राणवायु पूरे दिन को ऊर्जावान बना देती है और सकारात्मक सोच जीवन का आधार है|
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रख्यात चिंतक, साहित्यकार एवं फिल्म निर्देशक डॉ. चन्द्रप्रकाश द्विवेदी (प्रसिद्ध “चाणक्य” धारावाहिक से चर्चित) ने “भारतीय सांस्कृतिक अवधारणा में स्वास्थ्य चिंतन एवं वर्तमान संदर्भों में प्रासंगिकता” विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा—
- “विज्ञान यानी विशेष ज्ञान है, लेकिन जब उसमें संवेदना जुड़ती है तभी समाज का वास्तविक निर्माण होता है।”
- उन्होंने चिकित्सा को केवल व्यवसाय न मानकर सेवा और संवेदना से जुड़े कर्तव्य के रूप में देखा।
- वर्तमान जीवन की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि “आज तनाव और अशांति का मुख्य कारण दूसरों से प्रतिस्पर्धा करना है। हमें आत्म अवलोकन की आदत डालनी चाहिए और जैसा हम हैं, वैसा स्वयं को स्वीकार करना ही आनंद का वास्तविक मंत्र है।”
- डॉ. द्विवेदी ने भगवान बुद्ध के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि “मनुष्य की प्रवृत्ति सुखद स्थिति को स्थायी बनाने की होती है, लेकिन यही दुख का कारण बन जाती है।”
- उन्होंने गांधीजी के विचार “मुझे उतना ही मिले जितनी मुझे आवश्यकता है” को जीवन का सच्चा मंत्र बताते हुए कहा कि हमें दूसरों के मूल्यांकन और तुलना से बचना चाहिए।
- उन्होंने नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया—“I am not ok, You are not ok, but We are ok” और समझाया कि समाज और जीवन का संतुलन इसी विचार से संभव है|
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूज्य श्रीमद् जगद्गुरु सुखानंद द्वाराचार्य स्वामी राघव देवाचार्य जी महाराज ने कहा—
- “अच्छे राष्ट्र की रचना तभी संभव है जब हम राष्ट्र को आरोग्य बनाएंगे।”
- उन्होंने आहार, विहार और व्यवहार की शुद्धता को जीवन का मूल आधार बताते हुए कहा कि यदि यह शुद्ध रहेगा तो व्यक्ति और समाज दोनों स्वस्थ रहेंगे।
इस अवसर पर धन्वंतरि सेवा सम्मान से समाजसेवी अजय रघुवंशी जी को सम्मानित किया गया, जिन्होंने अनेक कैंसर रोगियों का नि:शुल्क उपचार कराया है।
कार्यक्रम का संचालन मिहिर कुमार ने किया तथा आभार प्रदर्शन मध्यभारत प्रांत अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने किया।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित जनों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे “My Health is My Responsibility” के मूलमंत्र को अपने जीवन में अपनाएंगे और समाज को स्वास्थ्य-जागरूक बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
