आरोग्य भारती द्वारा घर-घर औषधीय पौधे:हर घर औषधीय पौधे लगानें का आवाहन।

आरोग्य भारती द्वारा घर-घर औषधीय पौधे:हर घर औषधीय पौधे लगानें का आवाहन।

दिनांक 14 जून रविवार को सनातन धर्म महाविद्यालय पानीपत में आरोग्य भारती की वनोषधि प्रचार प्रसार आयाम की क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में 11 प्रान्तों से 42 कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यशाला चार विभिन्न सत्रों में आयोजित हुई।
कार्यशाला का उदघाट्न भारतमाता तथा आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलन ,पुष्प अर्पण और धन्वन्तरि स्तवन के माध्यम से कर किया गया । प्रथम सत्र में राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ अशोक वार्ष्णेय ने कार्यशाला की भूमिका पर प्रकाश डाला। राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राकेश पंडित जी ने अपने मुख्य प्रबोदन में वनौषधि आयाम के उद्देश्य कार्यपद्धति और कार्यक्रमों के बारे में विस्तार से बताया। औषधीय वनस्पतियों का सेवन कर स्वास्थ्य रक्षण,रोगों से बचाव तथा प्राथमिक स्तर पर होने वाले रोगों का ईलाज संभव है। इससे न केवल बिमारियों का बोझ डिसीज़ बर्डन कम होगा अपितु बिमारियों पर होने वाले खर्चों में भी कमी आती है। डा राकेश पंडित ने। आगे घर-घर औषधीय पौधे:हर घर औषधीय पौधे पहुंचाने, विद्यार्थियों को औषधीय पोधा मित्र तथा विद्यालयों में आरोग्य वाटिका स्थापित करने का आवाहन किया।आरोग्य भारती हरियाणा के पालक अधिकारी और सह प्रान्त कार्यवाह श्री राकेश त्यागी जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। मंच संचालन वनोषधि प्रचार प्रसार आयाम के राष्ट्रीय संयोजक डॉ दीपक तिवारी ने किया।
दूसरा सत्र शेक्षिक रहा जिसमे सर्वप्रथम डॉ महेश दधिची मुख्य कार्यकारी अधिकारी, राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड भारत सरकार, का उदबोधन रहा। उन्होंने अपने उदबोधन में राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड द्वारा संचालित विभिन्न स्कीमों के बारे में विस्तारपूर्वक बताया। साथ ही औषधीय पौधों की खेती में अपार सम्भावनाओं पर भी प्रकाश डाला। दूसरे वक्त डॉ नागेश गुलेरिया हिमाचल प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य वन सरंक्षण अधिकारी (रिटायर्ड) ने अपने व्यख्यान में औषधीय पौधों के सरंक्षण और संवर्धन पर विशेष रूप से जोर दिया। हिमालय क्षेत्रों में औषधीय पौधे किस प्रकार से आमजन की जीविका का माध्यम बन सकते है इस विषय पर भी उन्होंने प्रकाश डाला। तीसरे वक्त डॉ दीपक तिवारी ने वनोषधियों के विभिन्न प्रकार के उपयोगों पर जानकारी दी। अलग अलग प्रकार की आरोग्य वाटिकाओं की स्थापना पर भी उन्होंने विशेष बल दिया। इस सत्र का संचालन श्री संजीवन कुमार, राष्ट्रीय संयोजक, आरोग्य मित्र योजना ने किया।
तृतीय सत्र योजनात्मक सत्र में डॉ अशोक वार्ष्णेय ने वनोषधि प्रचार प्रसार आयाम के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रमों का ब्यौरा लिया और इस आयाम के अंतर्गत क्या क्या नवाचार किये जा सकते है इस पर चर्चा की। लगभग सभी प्रतिभागियों ने इस चर्चा में सकारात्मक रूप से भाग लिया। बहुत सारे उत्तम सुझाव इस सत्र में प्राप्त हुए। सत्र का संचालन हरियाणा प्रान्त के सह सचिव डॉ बलकार सिंह ने किया। चौथे और अंतिम समारोप सत्र में डॉ अशोक वार्ष्णेय व डॉ राकेश पंडित का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। कार्यक्रम संचालन राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ राज तायल ने किया। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की तरफ से कार्यक्रम की उत्तम व्यवस्था के लिये प्रान्त सचिव योगी यशपाल आर्य, सह सचिव डॉ बलकार सिंह, जिला अध्यक्ष डॉ सुनीत बजाज, जिला वनोषधि प्रमुख डॉ रवि कुमार, जिला पर्यावरण प्रमुख श्री वीरेंदर सिंह को सम्मानित किया गया। डॉ राज तायल ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। श्री निखिल जी द्वारा शांति मंत्र के साथ कार्यशाला संपन्न हुई। अंत मे महाविधालय प्रांगण आरोग्य वाटिका में सभी राष्ट्रीय पदिधिकारियों व कार्यक्रम में पधारे प्रतिभागियों द्वारा 24 अलग अलग प्रकार की औषधिय पौधे रोपित किये गए। रोपित किये पौधों में मुख्य रूप से पलाश, पारिजात, दालचीनी, ब्राह्मी, कपूर तुलसी, दमा बेल, निम्बू घास, इन्सुलिन प्लांट, गुड़मार, सोमलता, विधारा शामिल रहे।
आरोग्य भारती परिवार की और से सनातन धर्म महाविद्यालय की प्रबन्धक समिति और प्राचार्य को आरोग्य भारती के विभिन्न कार्यक्रमों में हर प्रकार के सहयोग के लिये विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

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