कुरुक्षेत्र । मंगलवार को श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में आयुष विश्वविद्यालय एवं आरोग्य भारती के संयुक्त तत्वावधान में “आयुष के नवीन आयाम” विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन महासचिव डॉ. अशोक वार्ष्णेय, वैध करतार सिंह धीमान कुलगुरु श्री कृष्णा आयुर्वेद विश्वविद्यालय,अखिल भारतीय आरोग्य मित्र प्रशिक्षण संयोजक संजीवन, प्रांत अध्यक्ष डॉ. पवन गुप्ता, योगी यशपाल आर्य प्रान्त सचिव आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता व कार्यक्रम संयोजक डॉ. सतबीर चावला ने भाग लिया। सभी महानुभावों ने भगवान धन्वतंरि के समक्ष दीप प्रज्जवलित करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में मुख्यवक्ता डॉ. अशोक वार्ष्णेय ने अपने उद्बोधन में कहा कि आयुष क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और देशभर में आयुष चिकित्सा पद्धति तेजी से विकसित हो रही है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर मेडिकल कॉलेजों तक अलग-अलग आयुष विंग स्थापित किए जा रहे हैं। यही नहीं, केंद्र सरकार देशभर में आयुर्वेदिक एम्स स्थापित करने की दिशा में भी कार्य कर रही है। डॉ.वार्ष्णेय ने कहा कि एक अच्छे आयुर्वेदाचार्य बनने के लिए सबसे पहले स्वयं को स्वस्थ रखना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, नियमित दिनचर्या और आयुर्वेद के सिद्धांतों को अपने जीवन में लागू करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में आयुष चिकित्सा पद्धति के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ रहा है और आयुर्वेद वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों को आयुष के क्षेत्र में शोध, नवाचार और जनसेवा की भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
इस अवसर पर आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति और मुख्य अतिथि प्रो.धीमान ने कहा कि आयुर्वेद की शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने और परिवार का पालन-पोषण करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। विद्यार्थियों को आयुर्वेद को अपने जीवन में उतारना होगा और इसके सिद्धांतों को व्यवहार में अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य की जिम्मेदारी स्वयं लेनी चाहिए। यदि आयुर्वेदाचार्य स्वयं स्वस्थ और अनुशासित जीवनशैली अपनाएंगे, तभी वे समाज को बेहतर स्वास्थ्य का संदेश दे सकेंगे।
अखिल भारतीय आरोग्य मित्र योजना प्रमुख श्री संजीवन ने कहा कि अस्पतालों में बढ़ती रोगियों की संख्या समाज के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि केवल अच्छे अस्पताल और दवाइयों के माध्यम से समाज को पूर्ण रूप से स्वस्थ नहीं बनाया जा सकता, बल्कि इसके लिए संतुलित जीवनशैली अपनाना आवश्यक है। कहा कि स्वस्थ जीवन मनुष्य की पहली आवश्यकता है और इसके लिए कारण, लक्षण तथा निदान तीनों स्तरों पर कार्य करना जरूरी है। इंद्रियों को नियंत्रित करने के लिए मन का मजबूत होना आवश्यक है और मन पर नियंत्रण पाने के लिए योग बेहद जरूरी है। योग व्यक्ति को मानसिक एवं शारीरिक रूप से संतुलित बनाता है। संजीवन ने लोगों से फास्ट फूड का त्याग कर संतुलित आहार-विहार अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में परिश्रमहीन जीवनशैली बढ़ती जा रही है। लोगों को स्वादिष्ट भोजन आसानी से मिल रहा है,लेकिन शारीरिक गतिविधियां कम होने के कारण मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अन्य कई गंभीर बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अपने खानपान, दिनचर्या और योग पर ध्यान दे तो अनेक बीमारियों से बचा जा सकताहै। कार्यक्रम में डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. रणधीर सिंह, आयुर्वेद अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. राजा सिंगला, डॉ. पीयूष चौधरी समेत संस्थान के सभी शिक्षक व 380 विद्यार्थी उपस्थित रहे। इसके साथ ही आरोग्य भारती जिला अध्यक्ष श्री रामनिवास, श्री बलवान स्वास्थ्य प्रबोधन प्रमुख, डॉ शंभुदयाल सह सचिव, विभाग संयोजक श्री शशिकांत, डॉ ईश्वर सिंह जिला संयोजक करनाल भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में डॉ पीयूष चौधरी ने सभी अतिथि गण का धन्यवाद किया।
